Bhagwan ki kahani तेरे नाम अनेक

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“Story in hindi हम ईश्वर को कई नामों से बुलाते हैं.

हर एक धर्म में इस परमात्मा के लिए अलग अलग शब्द का सम्बोधन है लेकिन ये परमात्मा एक ही है।”

हमारे किताबों में बहुत से bhagwan ki kahani है जो इस बात को सत्यापित करता है.

लेखक: प्रेम कुमार

भोला का तंग जीवन

ये story in hindi एक छोटे से गांव में भोला नाम के व्यक्ति की है. वह नाम और काम दोनों में ही भोला था. वह दिल से बहुत ही नेक और ईमानदार इंसान था लेकिन उसे कोई भी काम कुशलता से करना नहीं आता था. अच्छे से काम ना कर पाने की वजह से उसे अच्छे पैसे नहीं मिलते थे जिससे घर में पत्नी और बच्चों से बहुत तीखी बातों को सुनना पड़ता था.

अक्सर ऐसा होता था कि किसी ना किसी वजह से पत्नी से झगड़ा हो जाता था. वह गुस्से में घर से निकल कर नदी किनारे चला जाता था. यह सोचते हुए कि काम कहाँ खोजा जाए और घर कैसे चले. नदी किनारे रेत के टीले पर बैठकर बहुत देर तक सोचता रहता कि अपने लायक क्या काम करूँ कि थोड़े अच्छे पैसे मिले और घर की जरुरतें भी पुरी हो.

साधु से साक्षात्कार

कई दिनों तक ये सिलसिला चलता रहा पर उसे कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था क्योंकि बहुत जगहों से अपने बेढ़ंगे काम के वजह से निकाला जा चुका था. एकाएक उसका ध्यान एक साधु के ऊपर पड़ा जो बहुत ही देर तक प्रतिदिन नदी के किनारे हाथों में दो मालायें लेकर माला जपते रहते थे।

भोला सोचता है कि मैं दिन भर काम करता हूँ पसीने से तर बदतर हो जाता हूँ लेकिन इतने पैसा नहीं कमा पाता कि मेरा घर सही से चल सके और यह साधु किसका नाम जपता है कि इसके जीवन में इतनी शांति है और घंटों नदी किनारे बैठा रहता है. यह रहस्य जानने के लिए वह साधु के पास जाता है और उससे प्रश्न करता है।

साधु से भोले का प्रश्न

भोला, “आप केकर नाम जपते है कि नदी के धारे बैठे-बैठे ही आपका जिन्‍गी सुख से बीतता है? आर घर के जरूरत भी पूरी हो जाता है.”

चूँकि साधु ध्यान मग्न होकर माला जपते है इसलिए वह कोई उत्तर नहीं देते. भोला बार-बार अपने प्रश्नों को दोहराता है तो अंत में साधु कहते हैं, “जाओ, कल आना, कल बताऊंगा.”

भोला चला जाता है और अगले दिन सुबह, नहा धोकर नदी किनारे साधु के पास पहुँच जाता है. साधु महाराज ध्यान की अवस्था में होते है. भोला इस बार नम्रता से धीमे स्वर में विनती करता है।

भोला, “आप केकर नाम जपते है कि आपका जिन्‍गी एतना सुखी ढंग से बीतता है.” 

साधु महाराज ध्यान नहीं देते हैं।

भोला फिर पूछता है, “हम पूछ रहे हैं कि आप केकर नाम जपते हैं सो आपका जिन्‍गी एतना सुखी से बीतता है.”

बार-बार पूछने पर साधु परेशान होकर अचानक बोल पड़ते हैं, “ जाओ यहाँ से क्या टाँय-टाँय फुस फुसा रहा है?”

भोला को आभास होता है कि ये साधु माला जपते हुये यही बोलता है. भोला सोचता है मुझे मंत्र तो मिल गया लेकिन ऐसी दो मालायें और भगवा वस्त्र कहाँ से लाऊँगा. वह किसी तरह कर के एक दो दिन में भगवा वस्त्र जुगाड़ कर लेता है लेकिन वैसी मालायें नहीं मिलती हैं।

प्रस्तूत story in hindi vishnu bhagwan ki kahani है।

साधना के लिए भोले का जुगाड़

नदी किनारे जंगल में उसे बेल के पेड़ मिलते हैं और वह बेल तोड़कर एक एक सौ बेलों की दो बड़ी-बड़ी मालायें तैयार करता हैं. अब समस्या यह आती है कि इतनी बड़ी-बड़ी मालाएँ वह कैसे  फेरेगा. इस समस्या को दूर करने के लिए वह नदी किनारे लकड़ी का दो खंभे गाड़ता है और और उन दोनों के ऊपर और एक लकड़ी डालकर दोनों मालाओं को साइकिल के पहिए लगे स्पोक की तरह लकड़ी डालकर एक ही अक्ष में अगल बगल स्थापित करता है. ये व्यवस्था किसी मेले में आए बड़े झूले की भाँति लगता है. 

भोले की व्यवस्था

भोला ने माला जपने की सारी व्यवस्था तैयार कर ली.

अब बड़ी-बड़ी मालाओं की परिधि के एक छोर पर बैठकर दोनों हाथों से दोनों मालाओं के एक एक बेल को पकड़कर घूमता हुआ, उसके द्वारा प्राप्त “टाँय-टाँय फुस फुसा, टाँय-टाँय फुस फुस” मंत्र का जाप  पूरी श्रद्धा से करने लगा. ईश्वर की कृपा से उसका दिन यूं ही गुजरने लगा. भगवा वस्त्र और बड़े-बड़े दाढ़ी और बाल होने के कारण जिस भी गांव से गुजर कर घर को जाता तो लोग साधु महात्मा समझकर उसे कुछ पैसे या अनाज दान दे दिया करते थे. यह सिलसिला यूं ही चलता रहा और उसका जीवन भी ठीक-ठाक व्यतीत होने लगा.

 भोला ने देखा था कि साधु महाराज 9:00 बजे तक अपना जाप समाप्त कर देते थे. एक दिन ऐसा हुआ कि भोला को नदी के किनारे पहुंचने में ही 9:00 बज गए थे. अब वह आनन-फानन में अपना जाप शुरू किया और बहुत ही जल्दी जल्दी माला जपने लगा.

“टाँय-टाँय फुस फुस, टाँय-टाँय फुस फुस”

“टाँय-टाँय फुस फुस, टाँय-टाँय फुस फुस”

अगली बार आपको कौन सी bhagwan ki kahani पढ़नी है, हमेें जरूर लिखें.

भगवान विष्णु का आह्वान

 हुआ युँ कि इस दिन भगवान विष्णु अपने सभी प्राणियों के और अपने भक्तों के भोजन की व्यवस्था करके  स्वयं भोजन ग्रहण करने के लिए बैठे थे. लक्ष्मी माता उन्हें परोस कर भोजन देने ही वाली थी कि भगवान विष्णु को भोला की पुकार सुनाई देती है. भगवान विष्णु लक्ष्मी माता को भोजन परोसने से मना कर देते हैं और कहते हैं, “मेरा एक भक्त है जिसकी मैंने भोजन की व्यवस्था नहीं की है मैं उसकी भोजन की व्यवस्था करके आता हूं फिर स्वयम् भोजन करूंगा.”

इस पर माता लक्ष्मी कहती हैं, “आपका कौन ऐसा परम भक्त है जिसके लिए आप परोसा हुआ भोजन छोड़कर जाने को तैयार हो गये.”

 भगवान विष्णु कहते हैं, “है, मेरा एक परम भक्त जिसकी भोजन की व्यवस्था मैंने अभी तक नहीं की है. मुझे उसकी भोजन की व्यवस्था के लिए जाना ही पड़ेगा.”

 माता लक्ष्मी कहती हैं, “ऐसा कौन सा भक्त है जिसके लिए आप इतने व्याकुल हो गए हैं मैं भी उस भक्त से मिलना चाहूंगी.” 

 माँ अपनी इच्छा जाहिर करती हैं तो भगवान विष्णु उन्हें भी अपने साथ ले लेते हैं और  उसी नदी के किनारे आकर भोला से कुछ दूरी पर खड़े होकर भगवान विष्णु इशारा करते हुए कहते हैं, “हे देवी देखिए, मैं जिस भक्त की बात कर रहा था वह यही है.”

लक्ष्मी माता की शंका

  वह जब ध्यान देती है तो भोला के मुख से निकलने वाले शब्द, “टाँय-टाँय फुस फुस, टाँय-टाँय फुस फुस” को सुनकर गुस्सा जाती है.

 वह भगवान विष्णु से कहते हैं, “आपके मैंने हजारों नाम सुने हैं लेकिन टाँय-टाँय फुस फुस, टाँय-टाँय फुस फुस किसी प्रकार से कोई नाम प्रतीत नहीं होता है मुझे नहीं लगता है कि वह आपका नाम जप रहा है मैंने आज तक आपके लिये यह नाम किसी के मुख से नहीं सुनी हूँ.”

 भगवान विष्णु कहते हैं, “हे लक्ष्मी,  यह पूरी श्रद्धा के साथ मेरे ही नाम का सुमिरन कर रहा है।”

इस पर माता लक्ष्मी कहते हैं, “प्रभु, मैं नहीं मानती कि वह आपके नाम का जाप कर रहा है मुझे साबित करके दिखाए.” 

भगवान विष्णु कहते हैं, ” देवी अगर आप विश्वास नहीं कर रहे हैं तो आप खुद ही जाकर उससे क्यों नहीं पूछ लेते कि वह किसका नाम जप रहा है।”

हमारे Story in hindi वेबसाइट में bhagwan ki kahani और भी है.

भगवान विष्णु की परीक्षा

 अपनी शंका को दूर करने के लिए माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के भक्त के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी परीक्षा लेने चली जाती है।

 भोला  देर हो जाने की वजह से पहले ही परेशान रहता है और फिर माता लक्ष्मी वेश बदलकर भोला के सामने जाती है और उसकी कान मेँ धीरे से पूछती है।

 माता लक्ष्मी, ” ए, तुम किसका नाम जपता है?”

 भोला उनकी बातों को नजरअंदाज करता हुआ, सिमरन में और तेजी ले आता है।

“टाँय-टाँय फुस फुस, टाँय-टाँय फुस फुस…”

माता लक्ष्मी फिर पूछती हैं, ” ए, तुम किसका नाम जपता है?”

 भोला उनकी बातों को फिर नजरअंदाज करता हुआ सिमरन में तेजी ले आता है और मन ही मन सोचता है, “एकरा के अभी ही समय मिला है पूछने के लिए एक तो खुदे एतना देर हो गया ऊपर से यह आकर परेशान कर रही है।”

 अब बोला सिमरन के शब्द और भी तीव्रता से बोलने लगता है:

“टाँय-टाँय फुस फुस, टाँय-टाँय फुस फुस…” 

कोई उत्तर ना सुनकर माता लक्ष्मी फिर थोड़े जोर से पूछती हैं, “तुम किसका नाम जपता है?”

इतना तेज आवाज सुनकर परेशान भोला और भी उत्तेजित हो जाता है. एकाएक माता लक्ष्मी को गुस्से में जवाब देता है।

 भोला (गुस्से में): तोर भतार (मरद, पति) का नाम जपते है आर कुछो कहना है तोरा तो कहो।

और फिर तुरंत भोला माला जपना शुरु कर देता है. वह पहले से ही देरी से पहुंचा था और विलंब नहीं करना चाहता था।

 लक्ष्मी माता सर झुकाए विष्णु भगवान के पास पहुँचती हैं।

भगवान विष्णु: देवी, क्या आपको पता चला कि वह किसका नाम जपता है?

 माता लक्ष्मी शर्मिंदा थी, वह समझ चुकी थी कि वह उनकी परीक्षा ले रही थी जो पूरे विश्व के पालनहारे हैं.

संदेश व शिक्षा

श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन से यही कहा है, “हे अर्जुन, मैं मनुष्यों को उसी रूप में दर्शन देता हूँ।

जिस रूप और नाम से वे मुझे याद करते हैं. उसकी पूरी श्रद्धा मुझे प्राप्त होती है ना कि मेरे नाम अथवा शरीर को.”

  तेरे नाम अनेक हैं, पर तू एक है

Bhagwan ki kahani आप यहाँ से भी पढ़ सकते हैं Story in Hindi.

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