Funny Story in Hindi | Vivek Ki Pariksha

funny story in hindi with moral | राजा का समस्या

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लेखक: प्रेम कुमार

नीचे जा कर इस कहानी को आप सुन भी सकते हैं।

एक राज्य के राजा की एक ही पुत्री थी। ये funny story in hindi इसी राज कुमार की है।

उसकी पुत्री रूप और गुण दोनों ही तरीके से अच्छी थी। वह हमेशा चिंतित रहता था कि उसकी पुत्री उसके राज्य को राजा के बाद सही से नहीं चला पाएगी। 

समस्या का समाधान

राजा उसका विवाह बहुत ही सूझबूझ वाले और रणनीतिज्ञ लड़के से करना चाहता था।

लोभ और लालच के वश में आकर कोई भी राजकुमार उससे शादी करने के लिए तैयार हो जाता।

लेकिन राजा को एक दामाद के साथ-साथ राज्य को संभालने वाला शासक भी चाहिए था।

एक कुशल शासक के साथ-साथ एक दामाद का चयन कैसे किया जाए।

इस बात पर राजा चिंतन करने लगा। फिर उसे एक तरकीब नजर आती है और इसके आधार पर वो अपने दामाद का चयन करने का निर्णय लेता है।

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प्रतियोगिता की घोषणा | best funny story in hindi

राजा अपने राज्य में एक प्रतियोगिता रखता है।

अपने सैनिकों से पूरे राज्य में और आसपास के सभी राज्यों में इस प्रतियोगिता संदर्भ में नगाड़े बजवा देता है।

“सुनो…! हमारे राजा एक प्रतियोगिता का आयोजन आने वाली पूर्णिमा को कर रहे हैं। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले व्यक्ति को राजा के समक्ष राज दरबार में झूठ बोलना होगा। यदि राजा उस झूठ को स्वीकार कर लेंगे तो अपनी इकलौती पुत्री की शादी उस व्यक्ति से कर देंगे और उपहार स्वरूप अपने राज्य का आधा राज्य उसके नाम कर देंगे।” 

यह घोषणा सुनकर आसपास के बहुत सारे राजकुमार और बुद्धिजीवी प्रतियोगिता के लिए तैयारी करने लगे। वे बड़े से बड़े झूठ के निर्माण में लग गए। 

उसी गांव में राजू नाम का एक युवक था। वह मवेशियां चराया करता था।

वह दादी के साथ अकेला रहता था। उसके परिवार में और कोई भी सदस्य जीवित नहीं थे।

वह अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में अपनी जटिल पहेलियों और सूझ बुझ के कारण मशहूर था।

उसने सोचा, ‘राजा ने केवल झूठ बोलने पर अपने आधे राज्य देने के साथ-साथ राजकुमारी की भी उस व्यक्ति के साथ विवाह करने को तैयार हैं। जरूर इस प्रतियोगिता के पीछे कोई राज छुपा हुआ है।’

राजू भी अपने तरीके से एक कहानी मन ही मन रचता है। ये funny story in hindi के जैसा ही होता है।

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प्रतियोगिता का दिन

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पूर्णिमा का दिन आ चुका था सभी राज्यों से राजकुमार और बुद्धिजीवी राजा का दरबार पहुंचने लगे।

राजू अपनी दादी के पास जाता है। घर में रखी टूटी-फूटी ठेकी (चावल रखने की बहुत बड़ी टोकरी) मांगता है।

राजू वह ठेकी लेकर राजा के दरबार की ओर निकल जाता है।

राजा के दरबार में पहुंचकर राजू उस स्थान पर बैठ जाता है जहां लोग राजा के दरबार में आकर न्याय के लिए बैठते हैं।

राजा और राजकुमारों के साथ-साथ तमाम बुद्धिजीवियों के आ जाने के बाद दरबार में झूठ बोलने की प्रतियोगिता आरंभ होती है।

सभी को एक-एक करके अपना-अपना झूठ बोलने का मौका दिया जाता है।

राजकुमारों की बारी | very funny story in hindi

पहले राजकुमारों की बारी आती है।

दरबार में उपस्थित पहला राजकुमार कहता है, “महाराज, मैं जब आपके राज्य में प्रवेश किया तो देखा कि पहाड़ों के नीचे पड़े बड़े-बड़े पत्थर खुद-ब-खुद पहाड़ पर चढ रहे थे और चढ़कर नृत्य भी कर रहे थे।”

राजा कहते हैं, “हो सकता है”

दूसरा राजकुमार कहता है, “महाराज, आपके राज्य में मैंने एक अजूबा देखा, “दो बगुले एक लकड़ी के सहायता से एक हाथी को उड़ा कर ले जा रहे थे। हाथी जरा सा भी नहीं डर रहा था।

राजा ने उत्तर दिया, “हो सकता है।”

तीसरे राजकुमार की बारी आई।

तीसरा राजकुमार, “महाराज, मेरे दादाजी के पास इतनी बड़ी सीढ़ी थी कि उस धरती पर लगाने से सीधा स्वर्ग तक पहुंचती थी। मेरे दादाजी उसी सीढ़ी से स्वर्ग गए थे।”

राजा ने उत्तर दिया, “हो सकता है।”

इसी तरह एक-एक करके सारे राजकुमारों ने एक से बढ़कर एक झूठ बोले और सभी के झूठ पर राजा एक ही उत्तर देता गया “हो सकता है।”

राजकुमारों के झूठ बोलने का सिलसिला बंद होने के बाद अब बारी बुद्धिजीवियों की थी।

बुद्धिजीवियों की बारी

बुद्धिजीवियों ने भी भांति भांति प्रकार के झूठ बोले।

पहला बुद्धिजीवी, “महाराज, समुद्र में आग लगने के कारण सारा समुद्र सूख गया है। सब कुछ जलकर राख हो गया यहां तक कि पानी सहित नमक भी राख हो गया लेकिन समुद्र की सारी मछलियां बच गई। सभी मछलियां आग की लपटों के आसपास इकट्ठा होकर आग से अपना बदन सेक रही है।”

राजा ने उत्तर दिया, ” हो सकता है।”

एक-एक करके सारे बुद्धिजीवी भी पराजित होते जा रहे थे। राजा भी मायूस होता जा रहा था।

अब उसकी आवाज भी भावुक होने लगी थी।

राजा सोच रहा था कि उससे जिस तरह के वर की तलाश है शायद वह मिलना मुश्किल है।

राजा को अब तक ऐसा विवरण सुनने को नहीं मिला था जिससे कि ‘वह संतुष्ट हो जाए।

ऐसे ही सारे बुद्धिजीवी भी अपना अवसर गवा देते हैं।

कोई भी राजा को अपने व्याख्यान से प्रसन्न नहीं कर पाते हैं।

सभी राजकुमारों, बुद्धिजीवियों और उपस्थित लोगों में राजा के प्रति आक्रोश हो जाता है कि इतने बड़े से बड़े झूठ बोलने के बावजूद भी राजा मानने को तैयार नहीं है कि किसी ने झूठ बोला है।

सभी का उत्तर बस, “हो सकता है” “हो सकता है” कह कर टालता जाता है। 

अब तो पूरी सभा भी शांत हो गई थी।

किसी के पास गुस्से के अलावा कहने के लिए कुछ भी नहीं था।

राजु की विनती

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तभी राजू उठ कर खड़ा होता है और तमाम राजकुमारों, बुद्धिजीवियों और उपस्थित लोगों से विनती करता है।

” दरबार में उपस्थित सभी राजकुमारों, बुद्धिजीवी और उपस्थित लोगों सहित महाराज को भी प्रणाम करता हूं।

आपके समक्ष मैं एक विवाद का विवरण रखना चाहता हूं।

अभी आप सभी उपस्थित हैं तो इस विवाद का हल आप आसानी से निकाल सकते हैं। “

दरबार में उपस्थित सभी लोग एक स्वर में बोलते हैं,

“हां हां बेझिझक रखो हम तुम्हारी समस्या का समाधान अवश्य निकालेंगे।”

राजू कहता है,

“मैं महाराज के मुख से भी सुनना चाहता हूं की इस विवाद का संतोषजनक समाधान होगा।”

अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए राजा भी हाँ कर देता है।

तब राजू बोलता है, “मुझे उपस्थित सभी राजकुमारों, बुद्धिजीवियों और लोगों के न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।

उसी के आधार पर मैं अपनी बातों को आपके समक्ष रख रहा हूं।”

राजु की पहेली

राजु funny story in hindi बोलना शुरु करता है,

“आज से लगभग 200 साल पहले , मेरे दादाजी के दादाजी के दादाजी ने मुझसे कहा था ,

“उन्होंने महाराजा के दादा जी के दादाजी को इस ठेकी में (बहुत ही बड़ी टोकरी जो को साथ लेकर आया था) ठेकी का ठेकी, कितना ठेकी जो सोना, चांदी, हीरा, मोती और गहने दिए थे जिसकी कोई गिनती ही नहीं थी।”

मैं पिछले 10 सालों से प्रतिदिन महाराज के दरबार में आकर इस कटघरे से गुहार लगाता हूं,

“मेरे दादाजी के दादाजी के दादाजी ने जो धन आपके दादा जी के दादा जी को दिया था।

वह धन आप वापस कर दीजिए परंतु महाराज मेरी बात नहीं मान रहे हैं।

उपस्थित सभा से विनती है,

“महाराज से इस घटना की सत्यता का निरीक्षण करके मुझे मेरे हिस्से के धन देने के लिए राजी हो जाएं जिससे मैं अपनी गरीबी दूर कर सकूं और थोड़े अच्छे जीवन व्यतीत कर सकुँ।”

अपनी बातों को रख कर राजू चुप हो जाता है।

राजा का उत्तर

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अब पूरी सभा राजा से प्रश्न करने लगती है, “बताइए, महाराज ये बात सही है या गलत, इस युवक की कहानी सत्य है या फिर झूठ।”

महाराज पूरी तरह से धर्म संकट में पड़ जाते हैं।

यदि महाराज यह कह देते हैं कि यह वाक्य सही है। तो राजू अपनी ठेकी से महाराज के राजकोष से कितनी ठेकी हीरे जवाहरात ले जाएगा वो महाराज भी नहीं जानते हैं क्योंकि वह अपनी कहानी में अनगिनत ठेकी की ओर इशारा किया था।

यदि महाराज यह कह देते हैं कि यह कथन झूठ है तो अपने इकलौती बेटी की शादी उस युवक से करनी पड़ेगी और आधा राज्य उपहार के तौर पर देना पड़ेगा।

महाराज समझ चुके थे कि उन्हें जिस बुद्धिमान व्यक्ति की तलाश थी वह व्यक्ति यही है।

महाराज थोड़ा सोच कर कहते हैं कि ये नहीं हो सकता है, ये वाक्य बिल्कुल गलत है।

सभा में उपस्थित सभी व्यक्ति इसी मौके की फिराक में थे कि राजा कब किसी के बात को गलत कहेगा।

लगभग पूरी सभा एक स्वर में कहती है तब तो आपको अपनी इकलौती पुत्री का विवाह इस निर्धन युवक से करना पड़ेगा। 

राजा खुश था कि आखिरकार उसे एक ऐसा युवक मिला जो वाकई अपनी रणनीति में सफल रहा।

राजा हंसी हंसी अपनी इकलौती पुत्री का विवाह उस युवक से करने की घोषणा करते हैं साथ ही साथ में उपहार स्वरूप आधा राज्य देने का भी वचन देते हैं। 

सिख

विवेक, बुद्धि या ज्ञान कभी भी धन के बंधन में नहीं रहते। हमारे पास यह एक ऐसी शक्ति है जिससे हम पहाड़ जैसी समस्याओं का भी आसानी से हल ढूंढ सकते हैं। हो सकता है किसी हल को पाने में हमें थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़े मगर अपने विवेक के इस्तेमाल से हम उसे अवश्य ही प्राप्त कर सकते हैं। 

Listen the above story in our Podcast.

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