Ghost story in hindi real | Bhay hai to bhoot hai

Ghost story in hindi real

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ghost story in hindi real| Bhay hai to bhoot hai

लेखक: प्रेम कुमार

Ghost story in hindi ki bhumika

मेरा गाँव शिबुटाँड़ दामोदर नदी के किनारे बसा हुआ है। नदी से लगभग 2 किलोमीटर दक्षिण की ओर।

नदी के दोनों तरफ गाँव बसता है।

नदी को पार करने के लिए दोनों तरफ के लोग बाँस की पुलिया का उपयोग किया करते थे।

अभी वहाँ सेमेंट का पूल बन गया है। नदी के दोनों तरफ एक-एक किलोमीटर दूर तक जंगल है।

एक तरफ से दुसरे तरफ जाने के लिए जंगल को पार करना पड़ता है।

पुलिया के बगल में श्मशान घाट है, वहाँ मृत शवों को जलाया या दफनाया जाता है।

नदी के दोनों तरफ के लोग कुछ-न-कुछ काम से नदी को पार किया करते थे।

सुनसान रास्ते के साथ साथ, छोटे-छोटे जानवरों का डर और भूतों की कहानी सभी के लिए परेशानी की विषय था।

यहाँ के bhoot ki kahaniya बहुत प्रचलित हैं।

Pandit ji ki pareshaani

       उस वक़्त मेरी उम्र 11 या 12 साल होगी। मेरे गाँव में विभिन्न त्योहारों पर और पुर्निमा के दिन पूजा करने के लिए नदी उसपर से पंडित जी आते थे।

सभी घरों में पूजा करते करते पंडित जी को देरी हो जाती थी और पंडित जी अकसर आठ-नौ बजे घर जाते थे।

पंडित जी को घर उसी पुलिया से होकर जाना होता था।

समस्या ये थी कि तंत्र मंत्र का ज्ञान होने के बाद भी पंडित जी भूतों से डरा करते थे।

शायद उनके बचपन के दिनों में कोई ऐसी ghost story in hindi real घटना हुई थी जिसके कारण से उनके मन में भूतों के प्रति भय बैठ गया था।

दिनभर का पूजा पाठ तो वे बड़े अच्छे तरीके से कर लेते थे और शाम ढ़लते-ढ़लते उनके थैले में भर थैला प्रसाद और दक्षिणा हो जाता था।

लेकिन देर शाम को नदी पार कर घर जाना उनके लिए परेशानी का सबब था।

Bhoot ki kahaniya ke liye pandit jee ka upaay

एक दिन गाँव के 4 लड़कों से पंडित जी ने अनुरोध किया कि अगर लड़के उनको नदी पार करवा दें तो प्रत्येक लड़के को दिन के हिसाब से एक-एक रुपये और प्रसाद देंगे।

इससे पंडित जी को दो फाइदे थे:

  • अब देर तक रहकर पंडित जी पूजा करवा सकते थे।
  • दूसरा कि कभी-कभी समान अधिक हो जाने पर लड़के पंडित जी की साईकिल को नदी की चढ़ाई में धक्के भी दे देते थे।

लगभग प्रतिदिन एक-एक रुपये की कमाई के साथ साथ प्रसाद का ऑफर पाकर सभी चार लड़के तैयार हो गये।

जितनी बार पंडित जी गाँव में दिख जाते वे चार लड़के खुश हो जाते कि आज फिर कमाई होगी।

चारों लड़के मिलकर पंडित जी को नदी पार करवाने लगे।

लड़के बहुत ही निडर, चंचल और सहासी थे।

उन्हें ना तो भूतों का डर था, ना ghost story in hindi real पर विश्वास करते थे, नाही ।

Ladkon ka lobh

कुछ दिनों के बाद लड़कों को एक-एक रुपये की राशि में आठ-नौ बजे रात को नदी के किनारे सेवाऐं देने में घाटे का सौदा लगने लगा।

क्योंकि अब एक रुपये में मिलने वाला झाल मूढ़ी और सोनपपड़ी की मात्रा कम हो गई थी।

महंगाई की मार के कारण लड़के पंडित जी से दो-दो रुपये की माँग करने लगे और प्रसाद की मात्रा में भी बढ़ोतरी करने को कहा।

ना चहते हुए भी पंडित जी को लड़कों की माँग माननी पड़ी।

लड़के फिर खुशी-खुशी पंडित जी को नदी पार करवाने लगे।

Panditaayin ka sujhaav

चार-पाँच दिन अच्छा चला।

फिर पंडिताइन ने गौर किया कि कुछ दिनों से थैले में प्रसाद कम आ रहा है और पंडित जी की मेहनत उतनी ही है।

आजकल भी वे आठ-नौ बजे ही घर आया करते हैं।

बहुत जिद्द करने के बाद पंडित जी ने अपनी पत्नी को सारी सच्चाई बता दी।

पंडिताइन बहुत ही गुस्सा करने लगी, “पंडित होकर आप भूतों से डरते हैं तो आम लोगों का क्या होगा। देख लेना, आपकी डर की वजह से आपका कमाया हुआ सारा धन लड़के इसी तरह लूट लेंगें। फिर हमारी हालत भीख माँगने की हो जायेगी। आप पंडित हैं, मंत्र का जाप करते हुए नदी पार करेंगे तो कोई भूत कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।”

पंडिताइन की सुझाव से पंडित की आँखें खुल जाती है और लड़कों के लोभ को भाँप लिये।

अबकी बार पंडित जी पूजा करवाने गये और लौटते वक़्त देर रात को लड़कों की सहायता लेने से मना कर दिये।

पंडित जी को लड़कों ने समझाया कि भूतों के मामले में रिस्क नहीं लेना चाहिये, पंडित जी क्योंकि ghost story in hindi बहुत प्रचलित है।

लेकिन पंडित जी नहीं माने और लड़कों के सामने ही उनके लोभ का भांडा फोड़ दिया।

Pandit ka sahas

किसी भी चीज़ का फिक्र ना करते हुए पंडित जी जैसे ही जंगल प्रवेश किये हनुमान चलिसा का पाठ करने लगे।

पाठ करते करते पंडित जी श्मशान घाट पार कर गये।

थोडी देर में वे जंगल भी पार कर गये। एक दिन बिना किसी के सहारे नदी पार करने से पंडित जी के अंदर साहस आ गया।

अगली बार पंडित जी फिर से अकले ही नदी पार कर गये लड़कों को पूछा तक नहीं।

ऐसे ही कर के अब पंडित जी के अंदर साहस भरने लगा था और डर गायब हो रहा था।

फिर भी अगर सुनसान रास्ते में कोई आवाज़ आ जाती थी तो पंडित जी के पैर साईकिल के पैडल पर दो गुणे रफ्तार से घुमने लगते थे।

पंडित जी के साहस के कारण लड़कों के कमाई का जरिया बंद हो गया था जिसका लत खुद पंडित जी कि डर के वजह से लगा था।

ladkon ka shararat

               लड़कों ने सोचा कि अगर पंडित जी को भरपूर साहस आ गया तो हमारी कमाई तो बंद ही हो जायेगी।

पंडित जी का साहस तोड़ने के लिए और ghost story in real को हकीकत करने केे लिए लड़कों ने एक तरकीब निकाली।

पंडित जी राम नवमी में श्री राम जी की पूजा करने गाँव में आये थे।

हनुमान जी की मंदिर के सामने बैठकर सभी चार लड़के भूतों की कहानियों का किस्सा शुरू कर दिये इस तरह से कि पंडित जी भी सुन रहे थे।

अकसर कहानी शमशान घाट के समीप की थी।

हर बार की तरह इस बार भी पंडित जी को रात में घर उसी रास्ते से जाना था।

उससे पहले ही चारों जंगल के रास्ते में शमशान के समीप सारे कपड़े खोल कर पूरे शरीर में किचड़ का लेप लगा लिये।

मुँह से लेकर पुरा शरीर किचड़ से भरा हुआ था। देखने पर ऐसे लगते थे कि मानों वे इस ग्रह के हैं ही नहीं।

किचड़ लेपने के बाद सारे बच्चे रास्ते के समीप लगे वृक्ष पर चढ़ गये और पंडित जी के आने का इंतज़ार करने लगे।

Bhoot ka darshan

 इधर पंडित जी पूजा का समापन करके लगभग आठ बजे अपने घर की ओर प्रस्थान करते हैं।

आज रास्ते में जाते वक़्त हनुमान चालिसा के जाप के साथ साथ, मन ही मन भूतों के किस्से भी याद आ रहे थे।

वे बार बार ध्यान हनुमान चालिसा में लगाते और मन भ्रमित होकर भूतों के किस्सों में भटकने लगता था।

वे बहुत ही असहज महसुस कर रहे थे और उन्हें सहायता करने वाले लड़कों की याद आ रही थी।

इसी तरह डरते सम्भलते पड़ित जी शमशान के समीप उस जगह तक पहूँच जाते हैं जहाँ लड़के छुपे हुए थे।

जैसे ही पंडित जी उस पेड़ के समीप आते हैं जिस पर लड़के छिपे थे।

चारों लड़के अचानक उनके आगे कुद कर भूतों के जैसे नाचने लगते हैं।

पंडित जी के हनुमान चालिसा का पाठ तेज़ हो जाता है

जोर जोर से गाने लगते हैं, जय हनुमान, ज्ञान गुण सागर, जय कपिश, तिहु लोक उजागर…लेकिन भूत हो तो ना मंत्र का असर काम करें ये तो शरारती लड़के थे।

पंडित जी के पैर काँपने लगते हैं, पैडल मारना भी मुश्किल हो जाता है और साईकिल से गिर जाते हैं।

वह इतने घबरा जाते हैं कि सही से खड़े भी नहीं रह पाते और उनकी धोती खुल जाती है।

पंडित जी की ये स्थिति देखकर लड़के भी डर जाते हैं कि कहीं पंड़ित जी को कुछ हो गया तो आफत आ जायेगा।

ये सोच कर बच्चे भी भाग जाते हैं। थोड़ी देर बाद किसी को ना देख पाने से पंडित जी को साहस आता है।

वह जैसे तैसे धोती पहनते हैं, साईकिल उठाते हैं और दोगुणे रफ्तार से घर की ओर भागते हैं।

Antim charan

               घर पहूँचकर पंडित जी सारी घटना अपनी पत्नी को सुनाते हैं और बुरा भला भी कहते हैं कि तुम्हारी वजह से मैंने उन लड़कों को नदी पार करवाने से मना कर दिया।

आज मरते मरते बचा हूँ। अगली बार से पड़ित जी देर से घर जाना ही बंदकर दिये।

बहुत कम बार ही ऐसा होता था कि पंडित जी को देरी होती थी।

अगर देरी हो भी गयी तो रात किसी यजमान के यहाँ ही रूक जाते थे।

बच्चों के शरारत से ना तो बच्चों का फायदा हुआ ना ही पंडित जी कभी निडर बन पाये।

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