Hindi moral story short – Jaisa Mann Vaisa Jeevan

Hindi moral story short
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Hindi moral story short – Jaisa Mann Vaisa Jeevan

Hindi moral story short – “कोई भी आविष्कार किसी ना किसी आविष्कारक के मन की उपज होती है। उस वस्तु  की कला कृति पहले कारीगार या अविष्कारक के मन मंदिर में उपजता है फिर उसका मूर्त रूप कारीगार की मेहनत के अनुरुप  सबके सामने आता है। मनुष्य के जीवन का भी यही गणित है, विचार पहले मन में जन्म लेता है फिर व्यवहारों के द्वारा जीवन में प्रदर्शित होता है और मनुष्य का जीवन भी वैसा ही हो जाता है।”

लेखक: प्रेम कुमार

भूमिका (Moral hindi story)

एक गाँव में कोयले के खान में कार्य करने वाला भानु महतो नाम एक मज़दूर रहता था। घर में उसके अलावे उसकी पत्नी सीमा देवी और दो लड़के राज व विराज थे। वह दिनभर कोयले के खान में काम करता था और शाम को थकान मिटाने के बहाने से प्रतिदिन शराब पीता था। छोटा परिवार होने के बाद भी शराब के आदत ने घर को नरक बनाकर रखा था। भानु महतो अकसर शराब पीकर  घर में झगड़ा करता था। बात-बात में अपनी पत्नी को मारा भी करता था। अपने वेतन का ज्यादातर हिस्सा वह शराब और जुहे में बर्बाद कर देता था। घर में कभी शांति नहीं रहती थी। सीमा देवी बच्चों के पालन पोषण के लिए दुसरों के घर के काम किया करती थी। जैसे : कपड़े धोना, बर्तन धोना, सफाई करना इत्यादि।

बच्चे भी इसी परिवेश में बड़े हो रहे थे। वे अपने घर में रोज माता पिता के बीच लड़ाई झगड़े देखते। दिन ऐसे ही बीतता है बच्चे थोड़े बड़े हो जाते है। लम्बे समय तक शराब की लत ने भानु महतो की दोनों किड़नियाँ खराब कर दी। पैसे की तंगी के कारण ईलाज के अभाव में भानु महतो का देहांत हो जाता है। दो बच्चे और पत्नी घर पर बेसहारे हो जाते हैं। अब दोनों बच्चे भी कहीं कहीं काम करने लगते हैं और जैसे तैसे पढ़ाई करते हैं।

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परवरिश का असर

 आज राज व विराज की उम्र लगभग 32 से 35 वर्ष होगी। आज राज किसी नीजी कारखाने में काम करता है और अपने पिता की तरह ही शराब पीकर अपने बच्चे और पत्नी को परेशान करता है, उन्हें मारता है, वेतन का सारा पैसा जैसे तैसे खर्च कर देता है। जबकि विराज एक सफल बिजनेसमैन है। उसका परिवार बहुत ही सुखी सम्पन्न है, बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ते हैं और समाज़ में लोग उसकी इज्जत करते हैं।

राज के घर में झगड़ा हुआ था, मुझे राज को समझाने के लिये उनकी पत्नी ने अनुरोध किया। मैं एक शाम उनके घर जाकर उनसे बातें करने लगा।

सोच में अंतर (hindi moral story short)

बातों के दौरान मेरा एक सवाल था, “आप शराब पीकर घर में इतना झगड़ा क्यों करते हैं?”

राज ने उत्तर दिया, “सारी गलती मेरी नहीं रहती है। मुझे मेरी पत्नी भी परेशान कर देती है। फैक्ट्री में दिन भर की थकान के बाद मैं थोड़े शराब पी लेता हूँ तो क्या गलत करता हूँ। एक शराबी के बेटे से आप कितनी उम्मीदें रख सकते हो। पिता के आदतों का बेटे पर तो असर पड़ता ही है। बाल्यावस्था में ही पिता के देहांत के बाद मैं अपने पैरों पर खड़ा हुआ और आज नौकरी कर रहा हूँ। क्या ये पर्याप्त नहीं है।”

मैंने मन ही मन मंथन किया, “क्या वाकई कोई ऐसा होता है कि लोगों पर उनके माता या पिता के अच्छी या बुरी बातों का असर पड़ता है। इस बात के खंडन के लिए मैं राज के भाई विराज से मिलने गया। बात करने के दौरान मेरा एक सवाल था, “आप इतने सफल बिजनेसमैन कैसे है? आपकी सफलता और खुशहाल परिवार का राज क्या है?”

विराज ने उत्तर दिया, “मेरे पिता जी एक शराबी थे। वे अकसर शराब पीकर मुझे, मेरे भाई और मेरी माँ मारते और गालियाँ देते थे। उनके ऐसे व्यवहार से हमें बहुत परेशानी होती थी। पैसे की बर्बादी ने हमारा हाल बेहाल कर दिया था। माँ दुसरों के घरों में बर्तन धो कर हमारा पालन पोषण करती थी। ये परिस्थिति देख कर मैंने संकल्प लिया कि जीवन में मैं कभी भी ऐसी हरकत कभी नहीं करूँगा और शराब तो बिल्कुल भी नहीं पिऊँगा।”

जीवन in hindi moral story writing

दोनों भाईयों के लिए परिस्थितियाँ बिल्कुल एक जैसी थी लेकिन दोनों के सोच में अंतर था। सोच के इसी अंतर ने उन दोनों के भविष्य का निर्माण विभिन्न तरीके से किया। एक भाई आसमान के बुलंदियों को छुआ तो दूसरा उसी दल दल में पड़ा रह गया।

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