Hindi Story Akbar Birbal (बैशाख का धूप)

Image contributed by M Stories

लेखक: प्रेम कुमार

hindi story akbar birbal

शिकार की योजना

hindi story akbar birbal राजा अकबर का अचानक मन बनता है कि शिकार करने के लिए जंगल जाना चाहिए। 

राजा अकबर और बीरबल बैशाख की चिलचिलाती धूप में शिकार करने के लिए जंगल की ओर चले जाते हैं।

  बीरबल का मन ना होने के बावजूद भी आनन-फानन में राजा के साथ अकेले निकल जाते हैं।

बैशाख की चिलचिलाती धूप में   वो दोनों जंगल में बहुत आगे निकल जाते हैं।

बहुत देर तक इधर-उधर घूमने के बाद बीरबल को जोरों की प्यास लगती है और बीरबल प्यास से तड़पने लगते हैं।

बीरबल राजा से बार-बार आग्रह करते हैं कि मुझे प्यास लगी है और पानी  पीने के लिए कहीं रुकना चाहिए पर अकबर चलते ही रहते हैं।

बैशाख की चिलचिलाती धूप में रास्ते में कहीं भी पानी नजर नहीं आता है या कोई कुआं नजर नहीं आता है जहां से वह पानी पी सके।

चलते चलते बीरबल अपना धैर्य खो देते हैं और प्यास में तड़पते हुए बेहोश हो जाते हैं।  

पानी का जुगाड़

hindi story akbar birbal के अलावे भी आप हमारे वेबसाईट से स्टोरी पढ़ सकते हैं।

अब राजा अकबर को बेचैनी हो जाती है कि कोई सैनिक भी हमारे साथ नहीं आया है और बीरबल की यह हालत हो गई है अगर इसे कुछ हो गया तो बहुत ही समस्या खड़ी हो जाएगी। 

इसी उधेड़बुन के साथ राजा अकबर पानी ढूंढने के लिए जंगल में निकल पड़ते हैं।

बहुत दूर इधर-उधर घूमने के बाद उन्हें एक कुआं दिखाई देता है जिसमें बहुत ही कम पानी होता है। 

कुँए के सामने बस एक रस्सी रखी हुई रहती है और कोई भी बाल्टी या अन्य बर्तन रखे नहीं रहते जिससे कि पानी उठाया जा सके।

थोड़ा सोच-समझकर अकबर अपना जूता खोलते हैं और जूते को रस्सी से बांधकर कुएं में डालते हैं।

बारी बारी करके अपने दोनों जूते में दो जूता पानी भरकर बीरबल की ओर बढ़ते हैं।

राजा अकबर अपने दोनों जूते में भरा हुआ पानी बीरबल को पिलाते हैं और थोड़ी देर में बीरबल को होश आ जाता है।

फिर और शिकार ना करते हुए  अकबर और बीरबल राजमहल की ओर लौटने लगते हैं।

रास्ते में ही अकबर के मन में एक अहंकार जग जाता है कि इतना बुद्धिजीवी व्यक्ति जिससे मैं बार-बार हार जाता हूं।

इसको मैंने अपने जूते का पानी पिलाया।

और बीरबल का राज दरबार में खिल्ली उड़ाने का योजना बनाते हैं और बीरबल मन ही मन राजा को धन्यवाद देता रहता है कि किसी भी तरह करके राजा  राजा जी ने मेरी जान बचाई।

यही सोचते हुए दोनों अपने अपने घर चले जाते हैं। 

बिरबल का उपहास

अगले दिन राज दरबार में सभी राजदरबारी इकट्ठा होते हैं राजा का दरबार लगा हुआ रहता है।

तभी थोड़ी देर में बीरबल वहां पर आता है।

जैसे ही वह राजदरबार में प्रवेश करता है और राजा उसे देखते हैं अचानक से पुछते है।

राजा अकबर(उपहास उड़ाने वाले स्वर में बोलते): बीरबल, बैशाख का धूप कैसा था?

बीरबल शर्मिंदा होकर अपना सर नीचे झुका देते हैं। 

तभी सभी दरबारी पूछने लगते हैं, ” बताइए राजा साह, बैशाख का धूप कैसा था?”

बहुत शोर मचने लगता है तो राजा साहब बैशाख के धूप में शिकार पर जाने की सारी घटना का विवरण अपने राजदरबारी के सामने रख देते हैं।

यह जानकर की बीरबल ने राजा के जूते का पानी पिया है सभी राज दरबारी बीरबल का मज़ाक उड़ाने लगते हैं। 

बीरबल चुपचाप वहां से चले जाते हैं।

अगला दिन फिर बीरबल राज दरबार में आते हैं।

राजा के साथ सभी दरबारी पहले ही राज दरबार में बैठे रहते हैं और राजा

फिर से वही प्रश्न बीरबल से पूछते हैं “बीरबल, बैशाख का धूप कैसा था?” 

यह बात सुनने मात्र से ही सारे दरबारी जोर जोर से हंसने लगते हैं क्योंकि पूरी कथा उन्हें अब मालूम चल चुकी थी।

वह समझ गए थे कि राजा बीरबल का मज़ाक उड़ा रहे हैं।

बीरबल फिर मायूस हो जाते हैं और राजदरबार छोड़ कर चले जाते हैं।

यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहता है और बीरबल को प्रतिदिन राजदरबार में शर्मिंदा होना पड़ता है।

परिस्थितियों का मोहताज हो कर हुई एक घटना से बीरबल को बार-बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

बीरबल अगले एक-दो दिन तक राज दरबार में नहीं आते हैं तो सभी समझने लगते हैं कि हमने बीरबल को शर्मिंदा कर दिया। 

Hindi story akbar birbal बहुत ही रोमांचक होता है। अब पढ़े कि राजा के साथ क्या हुआ।

अकबर का संकट

दो  दिनों के बाद होता यह है कि राजा अकबर भोजन करके शयन कक्ष में सोने जाते हैं।

ज्यादा राजशाही भोजन होने के कारण 12:00 से 1:00 बजे के बीच ही उन्हें शौचालय जाने की तीव्र इच्छा महसूस होती है। 

किसी भी सैनिक को परेशान ना करते हुए राजा अकबर शौचालय जाते हैं।

जैसे ही राजा अकबर शौचालय में प्रवेश करते हैं और दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है।

वह परेशान हो जाते हैं कि ऐसा कैसे हुआ तभी अचानक देखते हैं कि कोने में  काले रंग का विशालकाय भूत खड़ा है।

राजा बहुत ही ज्यादा बेचैन और परेशान हो जाते हैं उन्हें समझ में नहीं आता है कि अब क्या किया जाए।

वार्तालाप:

 भूत कहता है, “राजा अकबर,  मैं कई दिनों से तुम्हारा इंतजार कर रहा था कि कभी तुम अकेले शौचालय आओ।

मैं तुम्हें अपना भोजन बना सकूं  लेकिन मुझे कभी तुम अकेले मिले ही नहीं जब भी आते थे अपने सैनिकों के साथ आते थे।

आज मुझे तुम अकेले मिले हो मैं आज तुम्हें अवश्य ही खा जाऊंगा।”

राजा अकबर विनती करते हैं, “हे भूत भाई, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है और तुम मुझे क्यों खाना चाहते हो।”

भूत जवाब देता है, ” राज,  तुम्हारे शौचालय के मल मूत्र वाले पानी से मेरे रहने का स्थान बहुत ही गंदा हो जाता है।

मैंने कई बार इशारे किए कि यहां से शौचालय हटा दो लेकिन तुम नहीं समझ पाए।

अब मुझे तुम्हें खाकर ही इस समस्या का समाधान निकालना पड़ेगा।

राजा बहुत ही ज्यादा डर जाते हैं और कहते हैं, ” हे भूत भाई,  मेरी इस गलती को क्षमा करो।

मुझे कोई और सजा दे दो। मैं वादा करता हूं कि यह शौचालय मैं यहां से हटा दूंगा और आगे से तुम्हें कोई भी परेशानी नहीं आएगी।

 लेकिन भूत नहीं मानता है और कहता है, “नहीं, नहीं इतनी चेतावनी ओं के बाद भी तुम मेरे बातों का उत्तर नहीं देते थे।

अब मेरे लिए यही एक विकल्प है कि मैं तुम्हें खा जाऊं।

 डरा और घबराया हुआ राजा बहुत ही ज्यादा मिन्नतें करने लगता है।

 फिर भूत कहता है, “ठीक है, मैं तुम्हारी गलती आखरी बार क्षमा करता हूं मगर सजा तो तुम्हें भुगतनी पड़ेगी।”

अकबर का जीवन दान

भूत का बदला हुआ मिजाज देखकर राजा कुछ भी करने को तैयार हो जाता है।

भूत कहता है, ” इसी बाल्टी के पानी की वजह से  मेरा घर गंदा होता है।

तुम इस बाल्टी का सारा पानी पियोगे। 

” जान बची तो लाख उपाय लौट के बुद्धू घर को आए।

“ना चाहते हुए भी राजा को नाक बंद करके बाथरूम के बाल्टी का सारा पानी पीना पड़ता है।

फिर राजा शौच करके अपने शयनकक्ष में पसीने से तरबतर होकर वापस आते हैं। 

किसी से कुछ जिक्र किए बिना राजा चुपचाप सो जाते हैं।

अगली सुबह तबीयत खराब होने की वजह से वह दरबार नहीं जाते हैं परंतु बीरबल दरबार आया हुआ रहता है।

राजा साहब के ना होने के बावजूद भी सारे दरबारी वही सवाल पूछते हुए बीरबल का उपहास उड़ाते हैं,

” बैशाख का धूप कैसा था” बीरबल कोई उत्तर नहीं देता है पर दरबार में बैठा ही रहता है।

अब बिरबल की बारी

अगले दिन राजा का  तबीयत अच्छा रहता है और वह राजदरबार आते हैं सभी दरबारी भी मौजूद होते हैं।

प्रतिदिन की भांति बीरबल  मुख्य द्वार से प्रवेश करता है और राजा जैसे ही बीरबल को देखते हैं। 

 राजा अकबर बोलते हैं, ” बीरबल,  बैशाख का धूप कैसा था?”

 सभी दरबारी हंसने लगते हैं।

सब की हंसी बंद होने के बाद,  बीरबल हंसते हुए जवाब देते हैं, ” राजा साहब, शौचालय का भूत जैसा था?”

    राजा अकबर सुन्न हो जाते हैं, उन्हें समझ में आ गया था  कि शौचालय का भूत कोई और नहीं बीरबल ही था।

किसी को शौचालय की घटना की जानकारी ना थी।

सारे दरबारी अकबर से पूछने लगते हैं, ” राजा साहब,  शौचालय का भूत कैसा था?” 

    राजा अकबर को अपनी गलती का एहसास हो जाता है की परिस्थितियों का मोहताज हुए किसी भी व्यक्ति का  मज़ाक या उपहास नहीं उड़ाना चाहिए।

“कबीरा गर्व न कीजिये, कबहू न हँसिये कोय।

अजहू नाव समुंदर में, न जाने क्या होय॥”

क्या आपको Hindi story akbar birbal अकबर और बिरबल की और भी कहानियाँ पढ़नी है तो हमें लिखें। Contact Us

1 thought on “Hindi Story Akbar Birbal (बैशाख का धूप)”

Leave a Reply

Scroll to Top
%d bloggers like this: