धैर्य और क्षमा (hindi story for kids with moral)

hindi story for kids with moral
images: courtesy of Pexels.com

लेखिका: मामता कुमारी

सम्पादक: प्रेम कुमार

hindi story for kids with moral धैर्य और क्षमा की शुरुआत

सालों पहले की बात है। एक गाँव में तीन भाईयों के साथ एक बहन रहती थी।

बहन का नाम रानी था। माता पिता के देहांत के बाद तीनों भाईयों ने अपनी बहन को बड़े प्यार से पाला था।

फूल सी बहन हर वक़्त सब के साथ खेलती कुदती रहती थी।

कुछ दिनों के बाद तीनों भाईयों की शादी हो जाती है। परिवार में तीन और नये सदस्य जुड़ जाते है।

रानी जिसे तीनों भाईयों ने बड़े प्यार से पाला था उसे घर का कोई भी काम नहीं करने देते थे।

रानी की तीनों भाभियों को उनके पतियों का प्यार अपने प्रति कम और अपने बहन के प्रति ज्यादा प्रतित होता था।

इस बात से तीनों भाभियाँ बहुत जलती थी लेकिन अपने पति से कुछ कह भी नहीं सकती थी।

विपरीत परिस्थिति

एक वक़्त आया जब गाँव के आस-पास काम नहीं मिलने लगा।

घर चलाने के लिये और बहन की शादी करने के लिये काम की तलाश में भाईयों को शहर जाने की जरुरत पड़ी।

सभी भाई शहर काम करने के लिये चल देते हैं।

अपनी एकलौती बहन रानी की जिम्मेवारी अब उसकी भाभियों पर आ जाती है। ईर्ष्या से जलती रहने वाली भाभियाँ अब अलग अलग तरीके से रानी को सताने लगती है।

कभी रानी को रानी को बासी खाना खाने के लिये देती तो कभी रानी भुखे पेट ही सो जाती। रानी से घर का सारा काम करवाने लगी।

रुखि सुखि खाकर घर का सारा काम करती फिर भी कोई गिला शिकवा नहीं करती।

“हंसते-हंसते हर गम सहना।

राजि तेरी रजा में रहना॥”

और भी hindi story for kids with moral हमारे वेबसाइट में मौजूद है।

रानी की परेशानियाँ

पहली परेशानी

एक दिन घर में आग जलाने के लिये लकड़ी खत्म हो गई।

सभी भाभियों ने रानी को लकड़ी लाने के लिये जंगल भेज दी।

रानी जंगल जाकर लकड़ी चुनती है और बैठ कर रोने लगती है। तभी वहाँ नाग राज आते हैं।

नाग राज रानी से पुछतें हैं, ” क्या हुआ बहन क्यों रो रही हो?”

रानी का कहती है, ” मेरी भाभियों ने मुझे जंगल भेजा है लकड़ी ले जाने के लिये लेकिन मैं रस्सी लाना भूल गयी।

अब मैं लकड़ी कैसे ले जाऊँगी।”

            नाग राज कहते हैं , “सुनो बहन, मैं रस्सी के जैसा हूँ, तुम लकड़ियाँ जमा करो, मैं तुम्हारे लकड़ियों के चारों ओर लिपट जाता हूँ, फिर तुम लकड़ियाँ उठा लेना और ले जाना”

रानी ऐसा ही करती है और सारी लकड़ियाँ घर ले आती है।

उसकी भाभियाँ चौक जाती हैं कि इसने ऐसा किया कैसे?

दुसरी परेशानी

            अब भाभियाँ और भी जलने लगती हैं, एक फुटा हुआ घड़ा देकर उसे दूर के तलाब से पानी लाने के लिए कहती है।

रानी तालाब जाकर बैठकर रोने लगती है तभी वहाँ पर मेढ़क का राजा आता है और पुछता है, “क्या हुआ बहन क्यों रो रही हो।”

            रानी कहती है, “मेरी भाभियों ने मुझे ये घड़ा दिया था पानी लाने के लिये लेकिन ये घड़ा फुट गया, अब मैं कैसे पानी ले जाऊंगी।”

            मेढ़क राजा कहता है, “बहन, घड़ा जहाँ फुटा है, मैं वहाँ बैठ जाता हूँ।

तुम पानी भर लो और ले जाओ। जब तुम घड़ा खाली करोगी तो मैं आ जाऊंगा।”

रानी ऐसा ही करती है और पानी भर कर ले आती है। यह देखकर उसकी भाभियाँ  उससे और जलने लगती है।

तिसरी परेशानी

सभी मिलकर और एक षड़्यंत्र रचती है, इस बार रानी की भाभियाँ एक किलो सरसो लेकर मैदान में बिखेर देती हैं।

रानी से कहते हैं, “तुम सारा सरसो चुन कर घर लेते आना।” रानी बैठकर रोने लागती है।

तभी वहाँ पर कबुतरों का राजा आता है और पूछता है, ” क्या हुआ बहन, क्यों रो रही हो?” रानी कहती है, “मेरी भाभियों ने मुझे सरसो लाने को कहा था लेकिन मुझसे सारा सरसो गिर गया, अब मैं कैसे ले जाऊंगी?”

कबुतरों का राजा सभी कबुतरों को बुला लेता है।

सारे सरसो को चुनकर रानी के बर्तन में रख देता है।

रानी से कहता है कि लो बहन, सरसो का ये बर्तन अपनी भाभियों को दे आओ।

रानी खुशी-खुशी घर आकर सरसो का बर्तन अपनी भाभियों को देती है।

भाभियों की ईर्ष्या

बहुत कोशिश कर के देख ली लेकिन रानी ने भाभियों की कभी भी कोई आलोचना नहीं की।

अंत में तीनों भाभियाँ रानी को अपने साथ बैर खाने के लिए जंगल ले जाती है।

जंगल में बैर के पेड़ पर बैर तोड़ने के लिये कहती है।

रानी पेड़ पर चढ़कर बैर तोड़ने लगती है।

नीचे खड़ी उसकी भाभियाँ पेड़ के चारों ओर काँटे डाल देती है और घर चली जाती है।

रानी पेड़ में बैठे-बैठे रोने लगती है।

थोड़े देर के बाद रानी के तीनों भाई उसी रास्ते से शहर से वापस आ रहे थे।

उन्हें किसी के रोने की आवाज़ सुनायी दी।

आवाज़ की दिशा में जाकर पेड़ के नीचे जैसे ही खड़े हुए, बड़े भाई के हाथ में आँसु के कुछ बुंदे पड़ती है।

ऊपर देखा तो उनकी बहन रानी पेड़ पर रो रही थी।

वे अपनी बहन को नीचे उतारते हैं फिर बहन अपनी आप बिती अपने भाईयों को बताती है।

भाईयों का आगमन

तीनों भाई अपनी बहन को पड़ोसी के घर में छुपाकर अपने घर जाते हैं।

हाथ-मुँह धोकर बैठते हैं और अपनी बहन को बुलाते हैं।

बड़े भाई की पत्नी मगरमच्छ के आँसु रोते हुए कहती है, “रानी अपनी सहेली के साथ मेला देखने पास के गाँव में गयी थी।

वहीं से गुम हो गयी, हमने कई दिनों तक उसको खोजा लेकिन कहीं नहीं मिली।”

फिर भाई पुछते हैं, “रानी जंगल में बैर के पेड़ पर कैसे चढ़ी?” सवाल सुनते ही साभी डर जाती है।

उन्हें समझ आ जाता है कि हमारे पतियों को सच्चाई मालूम चल गयी।

तीनों भाई अपनी अपनी पत्नियों को मारने लगते हैं तभी रानी वहाँ आ जाती है।

अपने भाईयों के मार से भाभियों को बचाती है। रानी कहती है, “ माफ कर दें भाई, भाभी सब अब ऐसी गलती नहीं करेगी।”

सभी भाभियों को अपनी गलती का एहसास होता है कि इतने प्रतांडित करने के बाद भी रानी के मन में क्षमा की भावना है।

रानी की भाभियाँ अपनी ननंद से माफी माँगती है।

धैर्य और क्षमा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है।

इस दोनों आत्मिक आभूषणों से कोई भी अपना जीवन स्वर्ग बना सकता है। 

इस बेवसाइट में भी आपको hindi story for kids with moral मिल जायेगा।

Leave a Reply

Scroll to Top
%d bloggers like this: