Motivational story in hindi for success -Ummid Zinda Hai

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Motivational story in hindi for success -Ummid Zinda Hai

लेखक: प्रेम कुमार

Motivational story in hindi for success: उम्मीद रूपी बीज और ज़ड़ को संघर्ष के पसीने से सिंचा जाये तो एक दिन ऐसा अवश्य आता है जब बीज बहुत ही विशाल वृक्ष का रूप धारण करता है। आप बहुत ही उदाहरण देखे, पढ़े या सुने होंगे। यहाँ पर उल्लेखित उदाहरण प्रकृति से ली गयी सच्ची घटना है।

वृक्षारोपण

               वर्ष 2004 के वर्षा ऋतु में, हमारे गाँव शिबुटाँड में बोकारो वन विभाग द्वारा वृक्षारोपन महोत्सव का आयोजन किया गया था।

विभिन्न प्रजातियों जैसे सागवन, युके लिप्टस, टिक इत्यादि के लगभग 100 पौधे स्टार क्लब (शिबुटाँड) के प्रांगण में,

हनुमान मंदिर के आस पास लगाये गये।

सभी पौधों का पालन पोषण अच्छे तरीके से हो रहा था।

कुछ दिनों तक अच्छे तरह से देखभाल किये गये पौधे थोड़े विकसित हुए।

पहली ग्रीष्म ऋतु जाते-जाते 30 से 40 पौधे मर गये और दूसरी ग्रीष्म ऋतु जाते-जाते केवल 30 से 40 पौधे जीवित रह पाये।

फिर एक वक़्त ऐसा आया जब केवल 10 पौधे वृक्ष बनने के लिए तैयार हो पाये।

संघर्ष भरा जीवन

               मैंने देखा है उसे ज़िंदगी के लिए जुझते और संघर्ष करते हुए।

सौ में से वो एक अकेला था जिसने सबसे ज्यादा तकलीफ सहा।

स्टार क्लब कार्यालय के समीप लगे इस सागवन वृक्ष को मैं जीवन कहता हूँ।

जीवन महज़ आठ महीने का था उसमें बड़े-बड़े चार-पाँच पत्ते आये थे।

मैं और मेरे दोस्तों ने जीवन के चारों ओर ईटों से घेराव कर दिया ताकि कोई जानवर उसके पत्तों को ना खाये।

फिर भी वो सलामत नहीं रह पाया। एक बैल उसके हरे पत्ते को खाने के लिए जबरन मुँह को घेरे के अंदर डाल दिया।

ईटें बैल का वजन सह नहीं पाये और सारे ईंट जीवन के ऊपर गिर गये।

जीवन का तना बीच से टूट गया और सारे पत्ते नष्ट हो गये।

अगली सुबह जब मेरे दोस्तों ने देखा तो बचे हुए तने को फिर से घेर दिया।

इंतज़ार की घड़ी

किसी भी Motivational story in hindi for success में मनुष्य को जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ता है।

               तने की नमी को देख कर हमें उम्मीद थी कि इसमें फिर से पत्तियाँ आयेंगी।

पास के नलकूप से मैं और मेरे मित्र समय समय पर एक-एक बाल्टी पानी डालते रहते।

जीवन तीन महीने केवल मूक दर्शक बनकर देखता रहा।

उससे कोई भी पत्ति नहीं निकली फिर सावन का महीना आता है, एक-दो बार बारिश पड़ती है।

खेतों और मैदानों में थोड़ी‌‌‌‌‌‌‌‌‌-थोड़ी हरियाली नज़र आती है।

इसी बीच, मैंने करीब जाकर देखा तो जीवन के तने के सबसे ऊपर वाले भाग पर दो तरु एक दूसरे के विपरीत दिशा में निकले थे।

जीवन ने हमारी उम्मीद टुटने नहीं दी।

कुछ दिनों के बाद दो चार और पत्ते नज़र आने लगे, पुरे वर्षा ऋतु भर जीवन बहुत ही अच्छे से विकास किया और एक स्वस्थ पौधा बन कर तैयार हो गया।

फिर से संकट के बादल

              जीवन इतना बड़ा हो गया था कि उसका घेराव उससे छोटा पड़ गया, वह घेरे की ऊँचाई से ऊपर निकल गया।

मैं और मेरे मित्रों ने सप्ताह के आने वाली रविवार को घेराव की ऊँचाई को बढ़ाने की योजना बनाई।

उससे पहले ही किसी ऊँचे कद के बैल ने उसके ऊपरी भाग के पत्ते खा गये।

नीचे के कुछ पत्ते ही बचे थे। जीवन ऐसे ही अपना समय बीताने लगा। लग रहा था वह सीधा कभी खड़ा नहीं हो पायेगा।

मुख्य तना कट जाने के कारण जीवन के बचे हुए तने में ज्यादा पत्ते और छोटी‌‌-छोटी टहनियाँ आने लगी।

छोटे कद में ही वह बिखरने लगा। फिर भी लग रहा था कि कम से कम वो जीवित तो है पर शायद नियति को यह मंजूर ना था।

जीवन के किस्मत में कुछ और ही लिखा था।

               प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी राम नवमी पूजा के शुभ अवसर पर सप्त दिवसीय मेला का आयोजन करने के  साथ साथ इस वर्ष यज्ञ करने का भी निर्णय स्टार क्लब के सदस्यों द्यारा लिया गया।

यज्ञ को सम्पन्न करने के लिए यज्ञ कुंड के साथ साथ एक रसोई घर की भी व्यवस्था की गई।

जहाँ ब्राह्मनों व श्रद्धालूओं के लिये भोजन बनाया जाता।

रसोई बनाने के लिए जीवन के बगल में खाली जमीन का उपयोग किया गया।

रसोई के लिए टेंट लगाते वक़्त जीवन के ऊपर घेराव का ईंटा फिर से गिर गया।

इस बार जीवन का तना भूमि से एक से दो इंच ऊपर टूट गया।

संघर्षरत जीवन

Motivational story in hindi for success संघर्षरत जीवन के बाद सफलता लिए प्रेरणा देती है।

जीवन के जीवन में फिर से संकट के बादल आ गये। शायद अब वो जीवित नहीं रह पायेगा।

उसका तना ही टुट गया था। मानो जैसे किसी इंसान की कमर टुट गई हो।

लोगों ने टुटे हुये भाग को तोड़ कर फेंक दिया और अब जगह का उपयोग रसोई बनाने के लिये कर लिया गया।

रसोई में चुल्हा जीवन के बचे हुए जड़ से दो से ढाई फीट दूर बनाया गया।

               राम नवमी अकसर अप्रैल के माह में आती है तो यज्ञ व मेला भी अप्रैल के भीष्ण गर्मी में सम्पन्न हुआ।

ज़ड़ जीवन उम्मीद लिए हुए ग्रीष्म ऋतु के साथ साथ चुल्हे की ताव को भी झेला।

कई बार कितने ही लोग आनन फानन में जीवन को पैरों से कुचलते हुए निकल गये। देखने से लगता था कि जीवन पुरी तरह से टुट चुका है।

कभी उभर कर बढ़ नहीं हो पायेगा।

लेकिन कुचलने वाले पैरों के नीचे जीवन हौसले को थामे सही वक़्त का बस इन्तज़ार कर रहा था।

अप्रैल, मई व जून तीन महीने तक जीवन का अस्तित्व नज़र नहीं आता है।

जीवन का हौसला

               जुलाई में हल्की-फुल्की बारिश शुरू हो जाती है इसी के साथ घास भी हरे होने लगते हैं।

इस बार जहाँ जीवन का ज़ड़ था उसके आस पास कुछ ज्यादा ही घास व छोटे-छोटे झाड़ियों (बरियार) के पौधे उग आये थे।

एक दिन मैं बरियार का दातून तोड़ने के लिए वहाँ गया तो देखा कि जीवन के ज़ड़ से छोटे-छोटे तीन चार पत्ते निकले थे।

दिल में एक अजीब सी खुशी और अचरज का अनुभव हुआ।

इतने सितम्ब के बाद भी जीवन ने हौसले को टूटने नहीं दिया और उम्मीद नहीं छोड़ी। उस वक़्त मुझे एक पंक्ति याद आयी:

“तू लाख कोशिशें कर मुझे दबाने की।

मैं बीज हूँ मुझे आदत है उग जाने की॥”

आसमान छुने का वक़्त

               ये इम्तेहन उसके लिए अबतक का आखरी इम्तेहान है, जीवन के हौसले को देखकर प्रकृति भी सहाय हो गयी।

जीवन के आस पास थोड़ी बडी-बड़ी झाड़ियाँ उग आयी इससे कोई जानवर उसके समीप नहीं जाने लगा।

पाँच वर्षों तक यूँ ही तक़लीफें सहने के बाद जीवन को रोकने वाला कोई ना था।

अब जीवन बहुत तेजी से बढने लगा शायद उसके ज़ड़ तकलिफें सह सह कर बहुत मजबूत हो गये थे।

थोड़े बड़े होने के बाद मेरे मित्रों ने उसके चारों ओर बाँस का घेराव कर दिया।

लग रहा था जीवन को आसमान छुने के पंख लग चुके थे।

वह मेरे अनुमान, ‘वो कभी सीधा बढ़ नहीं पायेगा’ को नकारता हुए सीधा और सबसे तेज बढ़ता जा रहा था।

               आज सौलह साल के बाद 2020 में देखता हूँ।

जीवन उसके हमउम्र के वृक्षों में सबसे बड़ा और विशाल वृक्ष है।

अभी जब भी जीवन को देखता हूँ तो लगता है कि ये मुझसे कुछ कह रहा है, मुझे कुछ सिखा रहा है।

सिखा रहा है, “कैसे उम्मीद का दामन थामकर रहना चाहिये?” “कैसे हौसले को बनाकर रखना चाहिए?”

“उम्मीद के बीज होते अंकुरित,

जो हौसले से सिंचा जाये।

निशान बनाती है रस्सी,

जब पत्थर पर घिसा जाये॥

जो बीज हर बार धरा में धस कर भी

उभरने की कला जनता है।

बनता है विशाल वृक्ष,

सभी को हवा, फल व छाया देता है॥”

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