Akbar Birbal Story in hindi – Sabse Bada Sukh

Akbar Birbal Story in Hindi

Akbar with birbal outside of his palace
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Akbar Birbal Story in Hindi –राजा अकबर और बिरबल की बहुत-सी कहानियाँ प्रचलित हैं, ये कहानियाँ बहुत ही रोचक और हस्य से पूर्ण होती है। आज मैं अकबर और बिरबल की और एक कहानी हिन्दी में सुना रहा हूँ।

लेखक: प्रेम कुमार

इस कहानी को सुनने के लिये नीचे जायें और Play बटन पर क्लिक करें।

Akbar Birbal Story in hindi ki Bhumika

               एक बार की बात है। राजा अकबर के किसी राज दरबारी को शादी के 12 सालों के बाद एक पुत्र की प्राप्ति हुई। अकबर और बिरबल उस राज दरबारी के घर उसे बधाई देने के लिए गये। दोनों ने उस राज दरबारी को बधाई दी। राजा अकबर के बधाई देने के बाद बातों ही बातों में राजा अकबर ने कहा: “इतने दिनों के बाद एक संतान की प्राप्ति होने से बाद बढ़कर दुनिया में कोई सुख नहीं है।” इस बार पर अवाक ही बिरबल को हंसी आ गयी। उपहास उड़ाने की जैसी हंसी सुनकर अकबर क्रोधित हो गये।

अकबर ने बिरबल से क्रोधित होकर पुछा, “ बिरबल, तुम्हें हंसी क्यों आ रही है?”

बिरबल हंसते हुए बोले, “कुछ नहीं महाराज, यूँ हीं हँसी आ गयी।”

इस पर अकबर और ज्यादा क्रोधित हो जाते हैं और बिरबल से कहते हैं, “बिरबल, यदि कल शाम तक तुमने साबित नहीं किया कि संतान की प्राप्ति होने से बढ़कर भी दुनिया में कोई दुसरी सुख हो सकती है तो मैं तुम्हें अपने राज्य से बाहर निकाल दूँगा।” कोई जवाब ना देते हुए बिरबल चुपचाप खड़े रहते हैं।

               सभी खाना खाने के लिए जाते हैं। राजा की खातिरदारी में राज दरबारी ने छप्पन भोग बनवाये थे। राजा अकबर आनंदित होकर भूख से कुछ ज्यादा ही खाना खा लेते हैं। राजा का बहुत अच्छे से सत्कार होता है। अकबर और बिरबल शाम ढलते-ढलते अपने-अपने घरों को लौट जाते हैं।

akbar birbal ki kahani दुसरे Website में

Birbal ka Paitra

       अगली सुबह बिरबल सूर्योदय से ठीक पहले राजा अकबर के शयनकक्ष के बाहर आ जाते है। राजा अकबर जैसे ही उठकर बाहर शौच के लिए निकलते हैं। बिरबल विनती करते हैं, “राजा साहब, आपको अभी इसी वक़्त मेरे साथ चलना होगा। एक अतिआवश्यक कार्य है।” राजा अकबर द्वारा मना करने के बाद भी बिरबल उन्हें मौहलत नहीं देते हैं और रथ में बिठाकर राजमहल से बाहर निकल जाते है।  बिरबल राजा को लेकर रथ में इधर-उधर देर तक घुमते रहते हैं।

Baatchit

राजा अकबर बार-बार बोलते हैं, “बिरबल, कुछ बता क्यों नहीं रहे हो, कहाँ लेकर जा रहे हो मुझें? कहीं पानी के स्रोत के समीप रोको मुझे शौच कर लेने दो।”

बिरबल राजा की बात को काटते हुए बोलते हैं, “बस राजा साहब कुछ दूर और।”

डेढ़-दो घंटे तक बिरबल राजा को रथ में घुमाते रहते हैं। राजा अकबर शौच के लिए ब्याकूल हो जाते हैं और क्रोधित होकर कहते, “बिरबल, अतिशीघ्र रथ को रोको मुझे शौच जाना है।”

बिरबल राजा की बात को अनसुना करते हुए बोलते हैं, “बस, राजा साहब कुछ दूर और।”

राजा अबकर की हालत ऐसी हो जाती है, मानो अब ना तब पजामा ऊपर से ढ़ीला, आगे से गीला और पीछे से पीला हो जायेगा।

राजा अकबर बिरबल से विनती करने लगते है, “बिरबल खुदा के वास्ते रथ को रोको, मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ता हूँ।”

बिरबल नाटक करता है कि उसने कुछ नहीं सुना है और रथ को एक नाले के सामने जान बुझ कर धीमा करता है। शौच के लिए ब्याकुल राजा आव देखे ना ताव और रथ से कुद जाते हैं और पास की ही झाड़ियों के पीछे बैठ जाते है। बिरबल फिर रथ रोक देते हैं। राजा अकबर शौच मुक्त होने के बाद हल्का महसूस करते है और शूकुन भरे स्वर में कहते हैं, “ इससे बड़ा आनंद दुनिया में कुछ नहीं हो सकता है। बाप रे बाप कितनी ब्याकुलता थी अंदर।”

बिरबल राजा अकबर की बात पर फिर हँसते हैं और कहते हैं, “राजा साहब, आप अभी सच बोल रहें हैं या उस वक़्त सच बोल रहे थे।”

Raja Ko Sabak ( Akbar Birbal ki kahani ka sabak)

अब राजा अकबर भी बिरबल के इस तरकीब से प्रसन्न थे। राजा अकबर को समझ आ गया था कि समय और परिस्थिति के अनुरूप व्यक्ति के लिए सुख और दुःख का पैमाना बदलता रहता है। सुख कितना भी सुखदायक क्यों ना हो वक़्त के साथ उसका महत्व घट जाता है और दुःख कितना भी दुःखदायक क्यों ना हो वक़्त के साथ भर जाता हैं।

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